Saturday, June 5, 2010

भारत में उड़ा पहला वायुयान


1895 ई. में शिवकर बापू जी तलपदे ने उड़ाया था पहला विमान

महर्षि भरद्वाज द्वारा वर्णित विमानों में से एक 'मरुत्‍सखा' विमान का निर्माण 1895 ई. में 'बम्‍बई स्‍कूल ऑफ आर्ट्स' के अध्‍यापक शिवकर बापूजी तलपदे, जो एक महान् वैदिक विद्वान् थे, ने अपनी पत्‍नी (जो स्‍वयं भी संस्‍कृत की पण्डिता थीं) की सहायता से विमान का एक मॉडल (नमूना) तैयार किया। फिर प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विवरणों के आधार पर एक 'मरुत्‍सखा' प्रकार के विमान का निर्माण किया। यह विकान एक चालकरहित विमान था। इसकी उड़ान का प्रदर्शन तलपदे जी ने बम्‍बई (मुम्‍बई) की चौपाटी पर तत्‍कालीन बड़ौदा नरेश सर सयाजी राव गायकवाड़ और बम्‍बई के प्रमुख नागरिक लालाजी नारायण के सामने किया था। विमान 1500 फुट की ऊंचाई के बाद इसका ऊपर उठना बंद हो जाता था। इस विमान को उन्‍होंने महादेव गोविंद रानडे को भी दिखलाया था। दुर्भाग्‍यवश इसी बीच तलपदेजी की विदुषी जीवनसंगिनी का देहावसान हो गया। फलत: वे इस दिशा में और आगे न बढ़ सके। 17 सितम्‍बर, 1917 ई. को उनका स्‍वर्गवास हो जाने के बाद उस मॉडल विमान तथा सामग्री को उत्तराधिकारियों ने एक ब्रिटिश फर्म 'रैली ब्रदर्स' के हाथ बेच दिया।

'राइट ब्रदर्स' के काफी पहले वायुयान निर्माण कर उसे उड़ाकर दिखा देनेवाले तलपदे महोदय को 'आधुनिक विश्‍व का प्रथम विमान निर्माता' होने की मान्‍यता देश के स्‍वाधीन हो जाने के इतने वर्षों बाद भी नहीं दिलाई जा सकी, यह निश्‍चय ही अत्‍यंत दुर्भाग्‍यपूर्ण है और इससे भी कहीं अधिक दुर्भाग्‍यपूर्ण यह है कि पाठ्य-पुस्‍तकों में शिवकर बापूजी तलपदे के बजाए 'राइट ब्रदर्स' (राइट बंधुओं) को ही अब भी प्रथम विमान निर्माता होने का श्रेय दिया जा रहा है, जो नितांत असत्‍य है।

संदर्भ:-

मातृवन्‍दना (वार्षिक विशेषांक), भारत की समृद्ध वैज्ञानिक परम्‍परा] f'keyk


Thursday, June 3, 2010

चीन के मोहताज हो जाएंगे भारत-बांग्लादेश

  • चीन की तिब्बत में उग्र ब्रह्मपुत्र नदी के उद्गम पर त्सांगपो के नाम से प्रसिद्ध इस नदी का रास्ता बदलने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। चीन ने नदी पर झांगमू पनबिजली परियोजना शुरू कर दी है। पूरी हो जाने पर इस विशाल बांध से चार करोड़ किलोवाट प्रति घंटे बिजली पैदा होगी, जो यांगत्से नदी पर दुनिया के सबसे बड़े थ्री गार्जिज बांध से पैदा होने वाली बिजली से दोगुनी होगी।

  • पता चला है कि इस साल 16 मार्च को इस परियोजना का उद्घाटन हुआ और 2 अप्रैल से निर्माण भी शुरू हो गया। भारत और बांग्लादेश का इन खबरों से चिंतित होना स्वाभाविक है। माननीय विदेशमंत्री ने हाल ही में राज्यसभा में कहा, जब हम बीजिंग में मिले थे तो इस परियोजना की बात उठी थी। चीन ने आश्वासन दिया है कि बांधस्थल पर पानी की कतई बर्बादी नहीं होगी और इससे बहाव के हमारे निचले क्षेत्र पर कोई असर नहीं होगा।

  • करीब चार साल पहले भी यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन तब चीन की एक सरकारी रिपोर्ट में इस दावे को खारिज करते हुए कहा गया था कि बांध का विचार अनावश्यक, अव्यावहारिक और अवैज्ञानिक है। अब तो चीन ने बांध बन जाने पर भारत, नेपाल और बांग्लादेश को सस्ती दरों पर बिजली देने की पेशकश कर दी है।

  • ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो हमारी आशंकाएं निर्मूल नहीं हैं, क्योंकि नदी के बदले गए रास्ते से चीन गोबी मरुस्थल में स्थित अपने उत्तरपश्चिमी जि़नजियांग और गान्सू प्रांतों की सिंचाई कर सकेगा। मतलब यह कि भारत और बांग्लादेश को सूखे की स्थिति में और बरसात के मौसम में बाढ़ से बचाव के लिए चीन का मुंह ताकना होगा।

  • इसका असर यह होगा कि दक्षिण एशिया के सर्वाधिक आबादी वाले हिस्सों में करोड़ों लोग मारे और बेघर हो जाएंगे। वैज्ञानिक लिहाज से बात करें तो सबसे पहले एक जलविज्ञान विशेषज्ञ जॉन होर्गन ने कहा था कि गोबी मरुस्थल का विस्तार रोकने के लिए चीन ब्रह्मपुत्र के पानी को उत्तर-पश्चिम ले जाना चाहता है।

  • सरकारी तौर पर इनकार के बावजूद, इस मामले पर चीन में उच्चतम स्तर पर कार्रवाई चल रही है। उदाहरण के लिए, ज़रूरत पड़ने पर नदी के उद्गम के निकट भौतिक स्थानीय विशिष्टताओं और रूपरेखा को बदलने के लिए चीन सीमित परमाणु विस्फोट कर सकता है।

  • चीन इस नदी के करीब 71.4 अरब घन मीटर प्रवाह में से करीब 40 अरब घन मीटर प्रवाह का रास्ता बदलने की सोच रहा है। इतने बड़े पैमाने पर नदी का रुख मोड़ने से भारत और बांग्लादेश जैसे देशों की खेती, मछली पकड़ने और दूसरी गतिविधियों की उम्मीदें खत्म हो जाएंगी, जहां 40 करोड़ लोगों की आजीविका नदियों के पानी पर निर्भर करती है।

  • भारत को एक और बात समझनी होगी कि चीन में अगर किसी योजना का खाका तैयार किया जाता है, तो उस पर अमल किया ही जाता है। खास बात यह है कि ग्रेट बेंड, भूकंप की जबर्दस्त संभावना वाले इलाके में स्थित है। एक विशाल जलाशय और कुछ विस्फोटों से भूकंपों का नया सिलसिला शुरू हो सकता है, जो अगस्त 1950 के भूकंप से भी अधिक विनाशकारी साबित हो सकता है।

  • अगर बीजिंग अपनी त्सांगपो योजना पर अमल करता है तो इसे दक्षिण एशिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा समझा जाएगा?

संदर्भ:-

एशिया डिफेंस न्यूज इंटरनेशनल, नई दिल्ली

Wednesday, June 2, 2010

कनाडा का वीजा चाहिए तो पहले 'गुप्‍त' ब्‍योरा दें

  • कनाडा सरकार ने अपने वीजा फार्म पर भारतीय अधिकारियों से जो ब्‍योरे मांगे हैं, वे बेहद संवेदनशील कहे जा सकते हैं। रिटायर्ड और कार्यरत सैन्‍यकर्मियों से उनके कामकाज से संबंधित जो जानकारियां मांगी गई हैं, वे उनकी पूर्व तैनाती, यूनिट के नाम, उनकी स्थिति, ड्यूटी का ब्‍योरे और उनसे उपर के अधिकारियों के बारे में हैं।
  • जहां तक सेना के विधान की बात है, इन जानकारियों को एकदम 'गुप्‍त' माना जाता है और इनके बारे में संबंद्ध व्‍य‍क्ति को नहीं बताया जा सकता।
  • अनावश्‍यक रूप से दखल देने वाले इस फार्म में आवेदक से उसकी पिछली सेवा का पूरा रिकार्ड देने को कहा गया।

मांगे गए ब्‍योरे निम्‍न प्रकार हैं:-

  • किस संगठन या यूनिट में आपने सेवाएं दीं हैं। सेवा के दौरान इन इकाइयों का ठिकाना कहां था। इनका क्‍या भूमिका थी और आपकी जिम्‍मेदारी क्‍या थी? किस वक्‍त इन इकाइयों में रहे, इनकी तारीख बताएं?
  • जिस यूनिट या संगठन में सेवा दी, उसमें क्‍या रैंक थी। अपने से उपर वाले अफसर का नाम और पद बताएं। उस अफसर के कमांडर का नाम, पद और ठिकाना क्‍या था?
  • क्‍या आप उग्रपंथियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले दस्‍ते के सदस्‍य थे। अगर थे, तो कब कहां यह कार्रवाई की गई? इस कार्रवाई के दौरान अपनी भूमिका के बारे में बताएं।
  • क्‍या आपकी यूनिट कैदियों या संदिग्‍ध उग्रपंथियों से तफ्तीश में शामिल थी? ऐसा है तो पूछताछ का तरीका क्‍या था और इसमें आपकी क्‍या भूमिका थी?
  • क्‍या ऑपरेशन ब्‍लू स्‍टार में शामिल थे?
  • आपकी जिम्‍मेदारियां क्‍या थी? गिरफ्तारी, छापेमारी, पूछताछ और अन्‍य कार्रवाइयों से जुड़ी विस्‍तृत जानकारियां मुहैया कराएं।

अफजल गुरू को मिल रहा है नक्सली समर्थन!

अफजल गुरू को मिल रहा है नक्सली समर्थन!

  • नक्सलियों के एक मुखपत्र के कवर पर अफजल गुरू की तस्वीर मिली है, जिसमे उसे राष्ट्रीयता के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति बताया गया है।

  • मुखपत्र में अफजल गुरू को कश्मीर में आजादी का संघर्ष करने वाला बताया गया, और कहा गया है कि भारत सरकार एक षड़यंत्र के तहत उसको फांसी की सजा दे रही है।

  • आईबी का कहना है कि नक्सली, कश्मीरी अलगाववादियों के समर्थन में उतर आए हैं। वे घाटी में अलगाववादियों द्वारा चलाए रहे संघर्ष में मदद कर रहे हैं।

  • इसके लिए नक्सलियों ने दिल्ली में अपना अड्डा बनाया है।

  • सरकार ने एक बार फिर पाकिस्तान से बातचीत शुरू कर दी है।

  • इसका मतलब है कि कश्मीर मसला सुलझाने के लिए घाटी के अलगाववादियों और घुसपैठियों के अलावा एक तीसरे व्यक्ति की भी भूमिका होगी, और वह नक्‍सली हैं।

  • यदि सरकार ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और झारखंड में नक्सलियों को नियंत्रित नहीं किया, तो वह कश्मीर घाटी में अलगाववादियों को समर्थन दे सकते हैं।

लाल आतंक:-

  • एक नक्सल पत्रिका के मुताबिक पिछले साल हुई नक्सली और सुरक्षा बलों की 392 मुठभेड़ में नक्सली 22 एके-47 राइफलें, 123 सेल्फ लोडिंग राइफलें, 303 हल्की मशीन गन और 93 दूसरे हथियार लूट चुके हैं। आईबी के मुताबिक दिल्ली के 25 थाना क्षेत्रों में नक्सली अपनी गतिविधि चला रहे हैं। केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों के 630 जिलों में से 220 जिलों को नक्सल प्रभावित घोषित कर चुकी है।

Tuesday, September 15, 2009

ये हैं गरीब देश के सांसद

इस गरीब देश के न प्रतिनिधियों ने जिनको हम सांसद कहकर शर्मिंदा होते हैं, गरीब जनता का खून चूसकर वसूले गए करों में से अपनी मौज मस्ती के लिए साढ़े तीन करोड़ खर्च कर दिए। अभी हाल ही में मीडिया में आई खबरों के बाद एस. एम. कृष्णा और उनके शशि थरूर को एक पाँच सितारा होटल छोड़ना पड़ा है लेकिन पिछले तीन महीने से सम्राट होटेल में ठहरे सांसदों पर 3 करोड़ 71 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इस बिल का भुगतान शहरी विकास मंत्रालय करेगा। दिल्ली के सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुभाष चन्द अग्रवाल द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई एक जानकारी में खुद सरकार ने शुलाया किया है कि 74 सासंद मई से जुलाई तक सम्राट होटेल में ठहरे थे। वैसे इस होटल में पर नाइट सुपर डीलक्स या डीलक्स सुइट का किराया 9000-8000 रुपए है। पर इन्हें 6000 रुपए की दर से दिया गया। इसके अलावा सांसदों ने होटल के जिम जिम से लेकर खाने और पीने में जमकर खर्च किया।

Wednesday, September 2, 2009

प्यार में फांसकर जिहादी बनाने की कोशिश

साभार : नवभारत टाईम्स २ सितम्बर २००९

यह आम भारतीय की आवाज है यानी हमारी आवाज...